Monday, 16 July 2012

कल रात तुझे सपने में देखा

कल रात तुझे सपने में देखा,
चाँद जमीं पर चलते देखा l
स्वर्ग लगे है कितना सुन्दर,
आज यहीं धरती पर देखा ll 
                 
                     तुम हँस दो तो जीवन चलता,
                      तुम गाओ तो बहती पवनें,
                      कैसे अंकुर वृक्ष है बनता,
                       नभ से जीवन झरते देखा ll


तुमको पाना ध्येय यही अब,
राह तू ही मंजिल तू ही अब l
नित-नित अपने सपनों को,
नयी चुनौती पढ़ते देखा ll 
                 
                         धर्म-ग्रन्थ का तू ही सार,
                          तू सावन तू ही आषाढ़ l
                          पल-पल तेरी यादों में,
                          मैंने स्वयं को जलते देखा ll

कल रात तुझे सपने में देखा,
चाँद जमीं पर चलते देखा ll

                     

12 comments:

  1. Very nice job!!!
    Inspirational and motivational lines...

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  2. Superb, kisko dekha uska naam bhi to pata chale... :)

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    1. h ha ha ha:):)haan Kinshu bolo-2 tell tell:):)

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    2. समय आने पर जरूर बताऊंगा।.....

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    3. ok kinshu... we r waiting for that 'samay'...:)

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  3. तुमको पाना ध्येय यही अब,
    राह तू ही मंजिल तू ही अब l
    नित-नित अपने सपनों को,
    नयी चुनौती पढ़ते देखा !!
    धर्म-ग्रन्थ का तू ही सार,
    तू सावन तू ही आषाढ़ l
    पल-पल तेरी यादों में,
    मैंने स्वयं को जलते देखा ll...Good lines
    Kinshu Good work....

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  4. बहुत खूब मित्र, खूबसूरत प्रयास, जारी रखना

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  5. प्रोत्साहन के लिए सभी को बहुत बहुत धन्यवाद ......

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  6. exellent lines...keep it up..

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  7. khubsurat kavita ke dhani nikle aap to bhaijaan. mast posts hai. keep up the good work.
    nitish

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